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प्रमुख खिलाड़ी कौन-कौन हैं

पिछले कुछ सालों में, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार काफी विस्तारित हुआ है पहले जहाँ बैंक आपस में लेनदेन करते थे अब बहुत सारे वित्तीय संस्थान भाग लेते हैं। इनमें ब्रोकर और मार्केट मेकर, गैर वित्तीय कॉरपोरेशन, निवेश फ़र्म, पेंशन फंड और हेज फ़ंड शामिल हैं।

इसका फ़ोकस आयातकों और निर्यातकों को सर्विस देने से लेकर विशाल विदेशी निवेश और वर्तमान के अन्य पुंजी प्रवाहों के प्रबंधन तक व्यापक हो गया है। हाल में, विदेशी मुद्रा डे ट्रेडिंग बहुत लोकप्रिय हो गया है, और विभिन्न फ़र्म छोटे निवेशक को ट्रेडिंग सुविधाएँ प्रदान करते हैं।

विदेशी मुद्रा एक 'ओवर-द-काउंटर' (OTC) बाजार है, जिसका अर्थ है यहाँ कोई सेंट्रल एक्सचेंज और ऑर्डर की मिलान करने वाला क्लीयरिंग हाउस नहीं होता है। हालाँकि, भौगोलिक ट्रेडिंग 'केंद्र' दुनिया में चारो तरफ मौजूद हैं, और (महत्ता के क्रम में) निम्न हैं: लंदन, न्यूयॉर्क, टोक्यो, सिंगापुर, फ़्रैंकफ़र्ट, जेनेवा और ज़्यूरिख़, पैरिस और हाँगकाँग। वास्तव में, विदेशी मुद्रा सौदे प्रतिभागियों के बीच विश्वास और अनुबंध का पालन करने की प्रतिष्ठा के आधार पर होते हैं। बैंकों द्वारा एक दूसरे के साथ कारोबार करने के मामले में, वे केवल उसी आधार पर करते हैं। खुदरा बाजार में, ग्राहक ट्रेडिंग करने के लिए फ़ंड जमा करने के बदले स्वयं और अपने ब्रोकर के बीच एक लिखित, कानूनन स्वीकार्य अनुबंध की मांग करते हैं।

कुछ बाजार प्रतिभागी मर्चेंडाइज़ की खरीद या बिक्री के लिए अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन करते हुए 'अच्छे' बाजार में शामिल हो सकते हैं। कुछ लोग संयंत्र और उपकरण में 'प्रत्यक्ष निवेश' में लगे हो सकते हैं या अल्पकालिक ऋण इंस्ट्रूमेंट में अंतर्राष्ट्रीय रूप से ट्रेडिंग करते हुए 'मनी मार्केट' में हो सकते हैं। विभिन्न निवेशक, हेजर्स और सट्टेबाज कुछ मिनटों से लेकर कई वर्षों तक किसी भी अवधि पर फ़ोकस किए हो सकते हैं। लेकिन चाहे आधिकारिक हो या निजी, और चाहे उनका उद्देश्य निवेश, हेजिंग, सट्टेबाजी, मध्यस्थता, आयात के लिए भुगतान करना या दर को प्रभावित करना हो, वे सब मुद्रा की समस्त मांग, और आपूर्ति में शामिल हैं - वे सब उस समय विनिमय दर निर्धारित करने में भूमिका निभाते हैं।

विदेशी मुद्रा कारोबार के विश्व बैंक

बैंक ऑफ़ कनाडा (कनाडा)

बैंक ऑफ़ कनाडा देश का केंद्रीय बैंक है। यह व्यावसायिक बैंक नहीं है और जनता के लिए बैंकिंग सेवाएँ नहीं प्रदान करता है। बल्कि, यह कनाडा की मुद्रा नीति, बैंक नोट, वित्तीय प्रणाली और फ़ंड प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। इसकी प्रमुख भूमिका, जैसा कि बैंक ऑफ़ कनाडा एक्ट में में परिभाषित है, 'कनाडा की आर्थिक और वित्तीय समृद्धि को बढ़ाना है'।

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम)

बैंक की भूमिका और कार्य इसके तीन सौ साल के इतिहास के दौरान विकसित हुई है। इसकी स्थापना के बाद से, यह सरकार का बैंकर रहा है, 18वीं सदी के उत्तरार्ध से, यह बैंकिंग प्रणाली के लिए बैंकर रहा है - बैंकरों का बैंक। अपने ग्राहकों को बैंकिंग सेवा प्रदान करने के साथ-साथ, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड यूके की विदेशी मुद्रा और स्वर्ण भंडार का प्रबंधन करता है।

बैंक के दो प्रमुख उद्देश्य हैं - मुद्रा और वित्तीय स्थिरता। बैंक शायद सबसे अधिक अपने बैंक नोट के माध्यम से, और हाल फिलहाल, अपने ब्याज दर निर्णयों के कारण सामान्य जनता की नजर में है। 20वीं सदी के आरंभ से इंग्लैंड और वेल्स में बैंक नोट के मामलों में बैंक का एकाधिकार रहा है। लेकिन केवल 1997 के बाद से ही बैंक यूके का आधिकारिक ब्याज दर निर्धारित करने के लिए वैधानिक रूप से जिम्मेदार हुआ है।

बैंक ऑफ़ जापान (जापान)

बैंक ऑफ़ जापान, जापान का केंद्रीय बैंक है। यह बैंक ऑफ़ जापान कानून (इसके बाद से कानून) के आधार पर स्थापित न्यायिक संस्था है और यह कोई सरकारी संस्था या निजी कॉरपोरेशन नहीं है। कानून बैंक के उद्देश्यों को 'बैंक नोट जारी करने और मुद्रा और आर्थिक नियंत्रण कार्यान्वित करने' और 'बैंकों के बीच और अन्य संस्थाओं के साथ फ़ंड के सहज निपटारे को सुनिश्चित करने, फलस्वरूप सुव्यवस्थित वित्तीय प्रणाली के रखरखाव में योगदान देने' के रूप में सेट करता है।

कानून बैंक के मुद्रा और आर्थिक नियंत्रण के सिद्धांत को भी निम्नानुसार निर्धारित करता है: 'इसका लक्ष्य मूल्य स्थिरता के अनुसरण के माध्यम से मुद्रा और आर्थिक नियंत्रण होगा, जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान प्राप्त हो।'

बैंक ऑफ़ मेक्सिको (मेक्सिको)

बैंक ऑफ़ मेक्सिको देश का केंद्रीय बैंक है, तथा कार्य और प्रशासन के मामले में संवैधानिक रूप से स्वतंत्र है। इसका उद्देश्य मेक्सिको की अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय मुद्रा प्रदान करना है। ऐसा करने के लिए, इसका मुख्य लक्ष्य मुद्रा की व्यय शक्ति को स्थिर करने का प्रयास करना है। इसके अतिरिक्त, यह बैंक पर निर्भर करता है कि वह वित्तीय प्रणाली के स्वस्थ विकास को बढ़ावा दे और देश की भुगतान प्रणालियों की कुशल कार्यपद्धति सुनिश्चित करे।

यूरोपीय केंद्रीय बैंक (यूरोपीय यूनियन)

यूरोप की मुद्रा, यूरो के लिए ECB केंद्रीय बैंक है। ECB का मुख्य काम यूरो की क्रय शक्ति, और लिहाजा यूरो क्षेत्र में मूल्य स्थिरता को कायम रखना है। यूरो क्षेत्र में 18 यूरोपीय यूनियन देश शामिल हैं जिन्होंने 1999 से यूरो की शुरुआत की।

फ़ेडरल रिज़र्व (यूनाइटेड स्टेट्स)

संघीय मुक्त बाजार समिति (FOMC) राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्यों को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा नीति तय करती है। न्यूयॉर्क फ़ेड के प्रेसीडेंट स्थायी वोट वाले एकमात्र क्षेत्रीय बैंक प्रेसीडेंट हैं और पारंपरिक रूप से वाइस चेयरमेन के रूप में चुने जाते हैं। अन्य प्रेसीडेंट बारी-बारी से एक साल के लिए सेवा में रहते हैं।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया

रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की मुख्य जिम्मेदारी मुद्रा नीति है। नीतिगत निर्णय, मध्यावधि में निम्न और स्थिर मुद्रास्फीति हासिल करने के उद्देश्य के साथ, रिज़र्व बैंक बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं। इसकी अन्य प्रमुख भूमिकाएँ वित्तीय प्रणाली में स्थिरता कायम रखना और भुगतान प्रणाली की सुरक्षा और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है। वित्तीय बाजार में बैंक एक सक्रिय प्रतिभागी है, ऑस्ट्रेलिया के विदेशी मुद्रा भंडार को प्रबंधित करता है, ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा जारी करता है और ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बैंकर के रूप में काम करता है। रिज़र्व बैंक द्वारा प्रदान जानकारी में आँकड़े - उदाहरण के लिए, ब्याज दर, विनियम दर और मनी और क्रेडिट विकास के ऊपर - और इसके क्रियाकलापों और अनुसंधान के बारे में व्यापक प्रकाशन शामिल हैं।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड (न्यूज़ीलैंड)

रिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड देश के केंद्रीय बैंक हैं। इसका कुल मिला कर उद्देश्य वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और कार्यकुशलता को कायम रखना है। यह ऐसा पाँच तरीकों से करता है:

  • मूल्य स्थिरता हासिल और कायम करने के लिए मुद्रा नीति का संचालन करना।
  • स्वस्थ और कार्यकुशल वित्तीय प्रणाली की कार्यपद्धति को बढ़ावा देना।
  • जनता की मुद्रा संबंधी जरूरतों को पूरा करना।
  • कार्यकुशल भुगतान प्रणालियों का पर्यवेक्षण और संचालन करना।
  • बैंक को प्रभावी समर्थन सेवाएँ प्रदान करना।

स्विस नेशनल बैंक (स्वीटज़रलैंड)

स्विस नेशनल बैंक देश की मुद्रा नीति का स्वतंत्र केंद्रीय बैंक के रूप में संचालन करता है। यह संविधान और कानून द्वारा समग्र रूप से देश के हितों के अनुकूल कार्य करने के लिए मजबूर है। इसका प्रमुख लक्ष्य आर्थिक विकास पर विचार करते हुए, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है। ऐसा करके, यह आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त परिवेश का निर्माण करता है। कानून बैंक के मुद्रा और आर्थिक नियंत्रण के सिद्धांत को भी निम्नानुसार निर्धारित करता है: 'इसका लक्ष्य मूल्य स्थिरता के अनुसरण के माध्यम से मुद्रा और आर्थिक नियंत्रण होगा, जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान प्राप्त हो।'

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